शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

साँची विवि में बौद्ध एवं सनातन दर्शन की शिक्षा दी जायेगी : शर्मा

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय विधेयक पारित
भोपाल 14 दिसंबर 2012। उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में बौद्ध एवं सनातन दर्शन की शिक्षा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को धार्मिक दृष्टि से नहीं, ज्ञान की दृष्टि से देखें। उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा विधानसभा में प्रस्तुत साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय विधेयक २०१२ पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उच्च शिक्षा मंत्री ने जवाब के बाद विपक्ष से सर्वानुमति से इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने का अनुरोध किया, लेकिन विपक्ष की असहमति के बाद विधयेक को ध्वनि-मत से पारित किया गया ।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राचीन भारतीय संस्कृति के मानदण्डों के आधार पर कई विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। ग्वालियर में राज मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय, उज्जैन में पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल में अटल बिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि साँची में विश्वविद्यालय स्थापित करने के पूर्व विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श किया गया है। साँची बौद्ध स्तूप में महात्मा गौतम बुद्ध के शिष्य सारिपुत्र एवे महामोद्गलायन की पवित्र अस्थियां सुरक्षित हैं, जिसके दर्शनार्थ  पूरे विश्व के बौद्ध संत एवं सामान्य जन प्रतिवर्ष साँची आते हैं। साँची का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है।
साँची विश्वविद्यालय  के अध्ययन-अध्यापन के संबंध में चर्चा करने के लिये १८ दिसंबर को सलाहकार समिति की बैठक बुलाई गई। समिति में हिमाचल के प्रो. सेमधोंग लोबसंग तेनजिन, गेसे सेमतेन, नई दिल्ली के डा. लोकेश चंद्र, डॉ. कपिल कपूर, यूएसए के डॉ. आनंद डब्ल्यु पी गुरूजे, नार्वे के एगिल लोथे, कनाडा के डॉ. अरविंद शर्मा, आस्ट्रेलिया के प्रो. पुरूषोत्तम बिलिमोरिया, भारत के प्रो. श्रीकान्थ कोण्डापल्ली, कोरिया के प्रो. जियो लियांग ली, नई दिल्ली के डॉ. सिद्वेश्वर परमेश्वर भट्ट एवं दो विश्वविद्यालय के कुलपति को शामिल किया गया है। बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में सुभाष कश्यप, जी पार्थसारथी और अरूण शौरी को भी आमंत्रित किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय में प्रारंभ में 5 संकाय होंगे। बौद्ध दर्शन, सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान अध्ययन, अंतर्राष्टीय बौद्ध अध्ययन, तुलनात्मक धर्माे और भाषा साहित्य एवं कला संकाय होंगे। विश्वविद्यालय की स्थापना में 450 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। इसके लिये 100 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में श्रीलंका और भूटान के राष्ट्र प्रमुख और प्रदेश के राजयपाल सहित अन्य गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित थे। श्री शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में अन्य देशों के शिक्षा केंद्र भी खुलेंगे। उन्होंने कहा कि विधेयक की चर्चा के दौरान प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों पर भी विचार किया जायेगा।
इनका कहना है
साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन केन्द्र को लेकर सदन में विपक्ष के व्यवहार की मैं निंदा करता हूं, मुझे आश्चर्य एवं दुख है कि विपक्ष ने इस विश्वविद्यालय की पवित्र भावनाओं को समझे बगैर उसका विरोध किया और उसे जातिवादी स्वरूप देने की कोशिश की। मेरा विश्वास है कि विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म और दर्शन का महान केन्द्र बनेगा।
लक्ष्मीकान्त शर्मा
मंत्री, उच्चशिक्षा एवं संस्कृति

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