सोमवार, 17 दिसंबर 2012

मध्य प्रदेश सरकार ने 91 करोड़ रूपये वसूली का मामला गंवाया: एनबीए


भोपाल 17 दिसम्बर 2012। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि एंटेग्राके खिलाफ 91 करोड़ रूपये की वसूली का मुकदमा जानबूझ कर हार गयी।
नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) ने मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि महेर परियोजनाकर्ता एस कुमार्स के साथ मिलकर उसकी कंपनी एंटेग्राके खिलाफ 91 करोड़ रूपये की वसूली का मुकदमा बम्बई उच्च न्यायालय में जानबूझ कर हार गयी है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेता आलोक अग्रवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश औद्यौगिक विकास निगम से हाल ही में प्राप्त दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बम्बई उच्च न्यायालय में निगम से महेर परियोजना की एस कुमार्स की कंपनी एंटेग्राके खिलाफ 91 करोड़ रूपये की वसूली का प्रकरण जीत जाने के बावजूद एस कुमार्स द्वारा दायर अपील में सरकार ने उससे मिलकर स्वयं अपने जीते प्रकरण को हरा दिया।
उन्होने अपने दावे के पक्ष में कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए कहा कि इसके बाद परियोजनाकर्ता से समझौते के नाम पर उच्च न्यायालय की कार्रवाई को रोक दिया गया।
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि न्यायालय से पूरे 91 करोड़ रूपये की वसूली संभव थी लेकिन वहां उसे बाधित करते हुए उद्योग मंत्री ने एस कुमार्स का पक्ष लेते हुए 55 करोड़ रूपये की छूट देने की सिफारिश की।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेता ने बताया कि महेर परियोजना के बारे में गत 14 दिसंबर को विधानसभा में यह जानकारी दी गई है कि परियोजनाकर्ता एस कुमार्स की कंपनी एंटेग्रापर औद्यौगिक विकास निगम के 91.06 करोड़ रूपये बकाया हैं।
उन्होने कहा कि इस बारे में एनबीए अपने वकील प्रशांत भूषण के जरिए एक कानूनी नोटिस निगम एवं राज्य सरकार को भेज रहा है। उन्होने कहा 
कि सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर कानूनी कार्यवाही एवं जमीनी संघर्ष दोनों किया जाएगा।
अग्रवाल ने कहा कि एनबीए सार्वजनिक पैसे के साथ इस खिलवाड़ की निंदा करता है और मांग करता है कि मामले की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो 
(सीबीआई) से करा कर दोषियों को दण्डित किया जाए और परियोजनाकर्ता की संपत्ति से वसूली कर जनता के पैसे वापस कराए जाएं।

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