गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

बिजली सप्लाई और मेंटेनेंस की फ्रेंचाइजी को लेकर शंका अनावश्यक

मप्र विधानसभा
भोपाल 13 दिसंबर 2012। ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल में बिजली की सप्लाई और मेंटेनेंस की व्यवस्था निजी फ्रेंचाइजी को देने के फैसले को लेकर आशंकाओं को अनावश्यक बताया है। उन्होंने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि ग्वालियर शहर के लिए शुरू हो रही फ्रेंचाइजी व्यवस्था केंद्र सरकार और योजना आयोग की पूरे देश के शहरों के लिए बनी नीति के अनुरूप है।
यह मामला कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर, डा. गोविंद सिंह और रामनिवास रावत ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए उठाया था। उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनी को जिम्मा देने से उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण नहीं हो पाएगा। मंगलवार को इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर सीने पर पोस्टर लगाकर सदन में धरना दे चुके तोमर गुरुवार को ध्यानाकर्षण पर चर्चा के लिए नाम पुकारे जाने के वक्त सदन में मौजूद नहीं थे।
रामनिवास रावत ने अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी से आग्रह किया कि उनका भी नाम है, इसलिए इस सूचना को कार्यवाही में लें। अध्यक्ष ने उनकी बात मान ली और इस सूचना के पहले एक अन्य ध्यानाकर्षण सूचना में कांग्रेस विधायक पुरुषोत्तम सोलंकी की अनुपस्थिति में इसी दल के चौधरी राकेश सिंह को मौका दिया। तब तक तोमर सदन में आ गए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य कई शहरों में भी लाइन लॉस ज्यादा है तो फिर ग्वालियर में ही क्यों निजीकरण किया जा रहा है। मसलन दतिया में 75 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि सरकार फैसला वापस नहीं लेगी तो वे फिर गर्भ गृह में धरना देंगे। मंत्री ने कहा कि 30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 83 शहरों में किया जाएगा। डा. सिंह ने कहा कि कंपनी को होने वाले लाभ का भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि नियामक आयोग जो दरें पूरे प्रदेश के लिए तय करेगा, वही फ्रेंचाइजी वाले शहरों में भी लागू होंगी। सवालों के जबाव में उन्होंने कहा कि ग्वालियर में पदस्थ विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारी चाहें तो फ्रेंचाइजी की सहमति होने पर वहीं पदस्थ रह सकते हैं। अन्यथा उन्हें कंपनी के कार्यक्षेत्र में अन्यत्र पदस्थ किया जाएगा।
 
जमीन अधिग्रहण के मामले में वॉक आउट
भोपाल 14 दिसंबर 2012। विधानसभा में एक बार फिर जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। डिंडोरी जिले में जमीन अधिग्रहण को लेकर उठे प्रश्न में राजस्व मंत्री यह नहीं बता सके कि आदिवासियों को जमीन के बदले जमीन दी गई है या नही? उन्होंने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार पांच लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की विपक्ष की मांग भी नामंजूर कर दी।
प्रश्नकाल में यह मामला ओमकार सिंह मरकाम ने उठाया था। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन का उनकी सहमति के बिना अधिग्रहण किया गया है। उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं मिला। जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार की तलाश में आदिवासी पलायन कर गए हैं। इस पर राजस्व मंत्री करणसिंह वर्मा ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के लिए सहमति जरूरी नहीं है और वर्तमान कलेक्टर गाइड लाइन के आधार पर मुआवजा दिलाएंगे। इस पर बिसाहूलाल सिंह ने सवाल उठाया कि सीएम की घोषणा के अनुसार पांच लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा क्या?
इस पर वर्मा ने जवाब दिया कि मामला 2006 का है। सीएम की घोषणा उसके बाद की है। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मुआवजा अभी दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सवाल उठाया कि आदिवासियों को जमीन के बदले जमीन देने के नियम का यदि पालन हुआ है तो उन्हें कहां जमीन दी गई? वर्मा ने कहा कि वे इसकी जानकारी बाद में दे देंगे। मंत्री के जवाब से नाराज विपक्ष ने वॉक आउट कर दिया।

विस में पेश हुईं याचिकायें
भोपाल 14 दिसंबर 2012। राज्य विधानसभा में गुरुवार को छह विधायकों सुदामा सिंह सिग्राम, रामगरीब कोल, विक्रम सिंह नातीराजा, सुनील जायसवाल, रामलखन सिंह तथा धु्रवनारायण सिंह ने अपने क्षेत्रों की विभिन्न जनसमस्याओं के निराकरण हेतु याचिकायें पेश की। 

प्रदेश में बंद कर देना चाहिए पीईटी परीक्षाएं
भोपाल 14 दिसंबर 2012। मध्य प्रदेश में पीईटी की परीक्षाएं बंद कर देना चाहिए। क्योंकि पिछले तीन साल में परीक्षार्थियों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ है। वर्तमान में प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 16 हजार से ज्यादा सीटें इस साल खाली हैं। यह कहना रतलाम से निर्दलीय विधायक पारस सकलेचा का है।
सकलेचा ने इस संबंध में विधानसभा में एक प्रश्न किए थे। इसके लिखित जवाब में तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि पिछले तीन सालों में इंजीनयिरिंग कॉलेजों में प्रवेश हेतु प्रतिवर्ष चार चरणों में काउंसलिंग का आयोजन किया गया।
पीईटी के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित नहीं किए गए हैं। इस पर सकलेचा ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करने हुए कहा कि इंजीनयिरिंग कॉलेजों की पीईटी के माध्यम से सीटें नहीं भर पा रही हैं तो सरकार को नई व्यवस्था लागू करना चाहिए।

- डॉ. नवीन जोशी

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