
इस्लामाबाद. पाकिस्तान में अल्लाह के नाम पर कत्ल का सिलसिला जारी है। इस बार अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री शहबाज भट्टी निशाना बने हैं। मंगलवार दिन में करीब 11.30 बजे वह जैसे ही घर से बाहर निकले, दो नामालूम हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं और भट्टी की मौत हो गई।
भट्टी उदारवादी नेता थे और लंबे अर्से से कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। भट्टी पाकिस्तानी संसद के अकेले कैथोलिक क्रिश्चियन सदस्य थे। कट्टरपंथी उन्हें ईश निंदा कानून में बदलाव का समर्थक मानते थे। उन्होंने देश के ब्लैसफेमी (पैगंबर की निंदा) कानून की कड़ी निंदा की थी। इसी के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
राजधानी के I-8/3 क्षेत्र में उनके घर के बाहर हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर स 15-20 सेकंड तक ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई। भट्टी आज सुबह घर से निकले और कुछ ही दूरी पर हमलावरों ने उनकी कार रोकी। ये हमलावर पहले से ही वहां तैयार थे। कार देखते ही उन्होंने अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दिया। इसी बीच दो हमलावरों ने उनकी काले रंग की टोयोटा कार का दरवाजा खोलकर उन्हें बाहर खींचने की भी कोशिश की, जबकि तीसरा हमलावर कलश्निकोव रायफल से लगातार गोलियां चलाता रहा। उन्होंने कार को छलनी कर दिया।
फायरिंग में ड्राइवर भी घायल हुआ। हमलावरों ने वहां कुछ पर्चे भी फेंके और उसके बाद सफेद रंग की कार से फरार हो गए। ये पर्चे तहरीक-ए-तालिबान के हैं, जिनपर लिखा है कि जो भी ईशनिंदा प्रस्ताव का विरोध करेगा उसका यही हश्र होगा। घटना के बाद ड्राइवर उन्हें नजदीक के अस्पताल ले गया लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। भट्टी को लंबे समय से आतंकवादी धमकी दे रहे थे, लेकिन इसके बाद भी उन्हें बुलेटप्रूफ कार उपलब्ध नहीं करवाई गई।
केंद्रीय मंत्री की हत्या के बाद इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। घटना के बाद प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी भी अस्पताल पहुंचे। पाकिस्तानी सरकार ने केंद्रीय मंत्री की हत्या की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के प्रवक्ता फरहनाज इस्फानी ने कहा कि पाकिस्तान में योजनाबद्ध तरीके से उदारवादी लोगों की हत्या की जा रही है।
ब्लैसफेमी कानून की आलोचना करने के बाद इसी साल 4 जनवरी को पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर दी गई थी। उन्हें, उनकी सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मी ने ही गोली मार दी थी। वे भी इस कानून की लगातार निंदा कर रहे थे और इस कारण कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। सलमान तासीर पाक राष्ट्रपति जरदारी और उनकी बीवी बेनजीर भुट्टो, जो स्वयं वर्ष 2007 में मार दी गई थीं, के साथी थे। वे पाकिस्तान में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों में से एक थे और उन्होंने ईशनिंदा कानून को समाप्त करने की मांग की थी, जिसके तहत इस्लाम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा सुना दी जाती है।
तासीर की हत्या के आरोपी सुरक्षा गार्ड को पाकिस्तान में हीरो माना गया और उसका हर जगह फूलों से स्वागत हुआ।
क्या पाकिस्तान में कट्टरपंथियों का राज कायम हो गया है? यदि ऐसे ही चलता रहा तो पाकिस्तान अहिष्णुता और आत्मध्वंस की गर्त में नहीं गिरता रहेगा? पाकिस्तान को बिगड़ते हालात से अब भी सबक नहीं लेना चाहिए और भारत से दुश्मनी निभाने के बजाय अपने मुल्क के हालात बेहतर बनाने पर जोर नहीं देना चाहिए? आप चर्चा में शामिल होकर दुनिया भर के पाठकों से अपनी राय साझा करें।
2-3-2011
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