बुधवार, 16 मार्च 2011

जादू की झप्पी से पिघल जाता है गुस्सा


नई दिल्ली याद कीजिए बचपन में जब मां को आप पर गुस्सा आता था तो आप उन्हें कैसे मनाते थे. याद आया? बिल्कुल सही आप उनके गले लग जाते थे. तब आपको पता नहीं था कि आखिर मां के गले लगते ही उनका गुस्सा कहां चला जाता है. मगर गुस्सा चला जरूर जाता था. दरअसल जब हम किसी को गले से लगाते हैं तो शरीर के हामोज़्न में बदलाव होने लगता है. गुस्से को बढ़ाने वाला मेल हामोज़्न टेस्टेस्टरॉन कम होने लगता है और आपका गुस्सा शांत हो जाता है.
ऐसा सिफज़् हम नहीं कह रहे हैं. हाल ही में कैलिफोनिज़्या विश्वविद्यालय की ओर से किए गए शोध में भी यह यह बात सामने आयी है कि एक जादू की झप्पी से गुस्सा तुरंत पिघल जाता है.
समाचार पत्र टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर के अनुसार कैलिफोनिज़्या विश्वविद्यालय की ओर से कराये गए शोध में यह बात सामने आयी है कि आलिंगन और स्पशज़् का संबंध कई ऐसे स्वास्थ्य गुणों से है जो तनाव और पीड़ा को कम करते हैं. शोध के अनुसार इसका प्रभाव सबसे ज्यादा महिलाओं पर होता है. यानी महिलाएं नाराज हों तो उन्हें जादू की झप्पी दे कर मनाया जा सकता है. मनोविशलेषक डॉक्टर वंदना प्रकाश ने बताया कि गले लगाने के साथ ही हमारे शरीर से गुस्से को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हामोज़्न तेजी से कम होने लगता है. किसी को गले लगाने में प्यार का एहसास होता है, यानी जब आप किसी को गले से लगाते हैं तो उसका सीधा मतलब होता है उसके प्रति प्यार जताना. उसे यह बताना कि आपसे गलती हो गयी वह आपको माफ कर दे.
अगर आम भाषा में कहें तो सिफज़् एक झप्पी गुस्से को मसके की तरह पिघला सकती है. प्यार से गले लगाने का प्रचलन हमारे देश में हमेशा से रहा है. मगर गले मिलने का ट्रेंड चला फिल्म ह्यमुन्ना भई एमबीबीएस से. जब फिल्म में मुन्ना भाई सभी को जादू की झप्पी देता था तो लोगों की आंखों में आंसू आ जाते थे। और इस फिल्म में किसी को गले लगाने के पीछे दशाज़्ई गई सद्इच्छा ने उसे जादू की झप्पी बना दिया|

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