कौशल विकास का मॉडल बनेगा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान
कौशल विकास और उन्नयन के प्रयासों में सहयोग करेगा योजना आयोग, कौशल विकास पर केन्द्रित राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ
Bhopal:Wednesday, September 1, 2010: मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि उनकी कोशिश मध्यप्रदेश को कौशल विकास के क्षेत्र में देश का आदर्श प्रदेश बनाने की है। श्री चौहान ने कहा कि रोजगारोन्मुखी शिक्षा और प्रशिक्षण के जरिये न केवल बेरोजगारी की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी बल्कि प्रदेश का औद्योगिक विकास भी तेज हो सकेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज दोपहर स्थानीय आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण विभाग द्वारा आयोजित कौशल विकास पर केन्द्रित राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन देश और प्रदेश में अगले दो दशक में दक्ष और कौशलयुक्त जन शक्ति की आवश्यकता का आकलन कर उसकी पूतिर् के लिये सभी जरूरी कदम उठायेगा। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में प्रदेश में स्थापित उद्योगों और आने वाले समय में लगने वाले उद्योगों की जरूरत के मुताबिक स्थानीय स्तर पर कौशल युक्त जनशक्ति तैयार करना समय की जरूरत है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन ने प्रदेश में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में निजी जन भागीदारी (पी.पी.पी.मोड) पद्धति को अपनाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि तीन माह में प्रदेश के शासकीय विभागों के अंतर्गत 25 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं पी.पी.पी.मोड में शुरू की जायेगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की आबादी में तेजी से वृद्धि के बावजूद उसे कौशलयुक्त बनाकर प्रदेश की संपदा में बदला जा सकता है। श्री चौहान ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि सभी विद्यार्थी उच्चतर माध्यमिक स्तर के बाद उच्च शिक्षा ही प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा उर्त्तीर्ण करने के बाद बहुसंख्यक विद्यार्थी रोजगारोन्मुखी शिक्षा और प्रशिक्षण लेकर रोजगार से लग सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में नयी आई.टी.आई. खोलने, विद्यमान आई.टी.आई. के उन्नयन के साथ ही परंपरागत हुनर वाले कारीगरों के कौशल उन्नयन की नीति भी इसी साल लागू कर दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यशाला के निष्कर्षों पर अमल किया जायेगा। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि कार्यशाला अपने उद्ददेश्य को प्राप्त करेगी।
तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि अगले तीन साल में व्यावसायिक कौशल और प्रशिक्षण के क्षेत्र में प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों के समकक्ष लाने की रणनीति पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कार्यशाला को इसी रणनीति का अंग बताते हुए कहा कि कार्यशाला के निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और प्रशिक्षण की सुविधाओं के विकास और विस्तार के साथ ही उन्हें परिणामकारी बनाने की दिशा में कार्य किया जायेगा।
मध्यप्रदेश के प्रयास सराहनीय
योजना आयोग के सदस्य डॉ. नरेंद्र जाधव ने मध्यप्रदेश में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और प्रशिक्षण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान खासतौर से बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री के कौशल विकास मिशन के अंतर्गत तेजी से काम किया है। डॉ. जाधव ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में देश का आदर्श राज्य बनाने के काम में योजना आयोग पूरी तौर पर प्रदेश के साथ है।
डॉ. जाधव ने कहा कि इस समय देश में युवाओं की संख्या विश्व में अधिकतम है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में युवा शक्ति की उपस्थिति के इस स्वर्णिम अवसर का उपयोग कर हम अपनी आर्थिक विकास दर को दो अंकों में पहुंचाने का करिश्मा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस युवा शक्ति का उपयोग न कर पाने पर भावी पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेगी। डॉ. जाधव ने कहा कि ऐसा हम तभी कर पायेंगे जब देश में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में अमूल-चूल बदलाव किया जाये।
डॉ. जाधव ने कहा कि युवा शक्ति को कौशल युक्त बनाने के लिये मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में उद्योग क्षेत्र को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर आने वाले समय में उद्योग क्षेत्र को भी दक्ष मानव शक्ति की भारी कमी से जूझना होगा। डॉ. जाधव ने रोजगार कार्यालयों की कार्य प्रणाली में भी बदलाव को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि इन कार्यालयों को काउंसलिंग और ट्रेनिंग से जोड़ना होगा। उन्होंने जानकारी दी कि भारत सरकार शीघ्र ही एप्रेंटिशिप एक्ट में जरूरी संशोधन करने जा रही है।
प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण डॉ. पुखराज मारू ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. मारू ने प्रदेश में कौशल विकास की वर्तमान स्थिति के साथ ही राज्य सरकार द्वारा इस क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
कार्यशाला में तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री श्री महेंद्र हार्डिया , मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री प्रशांत मेहता मंचासीन थे। कार्यशाला में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस, परिवहन मंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्रम मंत्री श्री जगन्नाथ सिंह, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री विजय शाह, पशुपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई सहित उद्योग समूहों, उद्योग संघों के प्रतिनिधि और देश भर से आये विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे। अंत में आभार प्रदर्शन संचालक प्रशिक्षण श्री शिवानंद दुबे ने किया।
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