मंगलवार, 31 अगस्त 2010

मिंटो हाल और गेमन इंडिया पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

भोपाल। मिंटो हाल और गेमन इंडिया के व्यवसायीकरण करने को लेकर नगर तथा ग्राम निवेश के अधिनियम 1973 की धारा 23 की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए भोपाल सिटीजन फोरम द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी श्रीवास्तव एवं जस्टिस बीएस चौहान की युगलपीठ ने राज्य सरकार के सात विभागों को नोटिस जारी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

सिटीजन फोरम द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि उनके द्वारा मप्र उच्च न्यायालय में राज्य सरकार द्वारा मनमाने ढंग से एतिहासिक धरोहरों के व्यवसायीकरण करने को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करने के बाद राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश को निरस्त तो कर दिया गया, लेकिन धारा 23 (क) के तहत जारी हुए आदेश की संवैधानिकता को संवैधानिक माना है। यही नहीं उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को पुन: व्यवसायीकरण के आदेश जारी करने की छूट भी दे दी। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि भू-उपयोग संबंधी शासन के निर्णयों में हस्तक्षेप उचित नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव अग्रवाल एवं सिद्धार्थ गुप्ता ने पैरवी करते हुए कहा कि धारा 23 (क) के तहत राज्य सरकार को असीमित अधिकार दिए गए हैं, जिसके चलते वो किसी भी क्षेत्र का विकास योजना के विरूद्ध भू-उपयोग परिवर्तन कर सकती है। श्री अग्रवाल ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि मिन्टो हाल (पुरानी विधानसभा) एक एतिहासिक धरोहर है लेकिन 23 (क) के तहत इसका उपांतरण नहीं किया जा सकता है। याचिका पर सुनवाई करने के बाद युगलपीठ ने राज्य सरकार के सात विभागों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है, जिनमें आवास एवं पर्यावरण विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश, भोपाल विकास प्राधिकरण, लघु उद्योग निगम, भोपाल कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त भोपाल एवं गेमन इंडिया शामिल है।
Date1spt2010

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