
शेहला कहीं कट्टरपंथियों के निशाने पर तो नहीं थी
भोपाल 31 अक्टूबर 2011। शेहला मसूद हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई ने अब शेहला के घर के आसपास अपनी जांच केंद्रित की है। हत्याकांड के दो महीने बाद शेहला के पिता सुल्तान मसूद हज पर चले गए हैं और बहन आयशा वापस अमेरिका। जांच एजेंसी इस बिंदु पर भी अपना ध्यान लगाए है कि शेहला कहीं कट्टरपंथियों के निशाने पर तो नहीं थी।
इवेंट मैनेजमेंट कंपनी चलाने वाली शेहला आरटीआई कार्यकर्ता भी थीं। 16 अगस्त को उनकी कोहेफिजा स्थित घर के सामने ही कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड की जांच अब सीबीआई कर रही है। जांच में लगी सीबीआई अब तक पांच दर्जन से ज्यादा लोगों के बयान ले चुकी है। शेहला के निजी जीवन से लेकर उनके सार्वजनिक क्रियाकलापों की लंबी फेहरिस्त सीबीआई के पास है। सीबीआई ने शुरुआत से ही जांच का दायरा उनके घर के आसपास रखा था। अभी भी जांच उसी दायरे में है।
जांच में लगी सीबीआई उनके भाजपा और संघ से कनेक्शन के अलावा इस बात को भी तलाश रही है कि आखिर वो किसकी आंखों की किरकरी थीं। इसमें एक बात ये भी है कि क्या शेहला ने किसी खास मकसद से एक भाजपा नेता के जरिए पार्टी में संपर्क बढ़ाए और फिर संघ से जुड़े नेताओं के करीब पहुंची।
इस दौरान क्या शेहला अपने बिजनेस में लग गई और कुछ नेताओं से उनकी दोस्ती नजदीकियों में बदल गई। क्या यह नजदीकियां कुछ कट्टरपंथियों को अखर रही थीं? और एक सवाल ये भी कि छोटे-छोटे मसलों पर प्रतिक्रिया देने वाले मुस्लिम वर्ग ने शेहला की हत्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सीबीआई ये भी जांच रही है कि कैसे सामान्य परिवार की शेहला नेताओं के करीब पहुंच कर उनकी मित्र बनीं। व्यवसाय स्थापित किया और इस हद तक कि उन्हें हर स्तर पर उपकृत किया गया। इन सब बिंदुओं पर जांच कर रही जांच एजेंसी को ये भी पता चला है कि शेहला अपने पास सुरक्षा की दृष्टि से हथियार भी रखती थीं। ये हथियार कौन सा था? ये उनके नजदीकी लोगों से पता किया जा रहा है। पहले ये बात आई थी कि उनके पास लाइसेंसी हथियार था, लेकिन बाद में इसकी पुष्टि नहीं हुई। शेहला की जान लेने वाली गोली का खोल आखिर कार में क्यों नहीं मिला? इस सवाल का जवाब भी तलाशा जा रहा है।
Date: 31-10-2011
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