बेटी बचाओ अभियान में समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी-श्रीमती रंजना बघेल
भोपाल 3 अक्टूबर 2011। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती रंजना बघेल ने जनप्रतिनिधियों, समाज सेवियों, स्वैच्छिक संगठनों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बेटी बचाओ अभियान में अपनी सक्रिय सहभागिता निभायें। बिगड़े लिंगानुपात को सुधारने के लिए प्रत्येक भावी माता-पिता को यह संकल्प लेना चाहिए कि उनकी जो संतान कोख में आयेगी, उसका कत्ल नहीं होगा। शिशु-मातृ मृत्यु दर और स्त्री स्वास्थ्य के आंकड़े भी यही कहते है कि भविष्य में बच्चों को सेहत और सुरक्षित माहौल देना है तो बालक-बालिकाओं को जन्म देने का समान अधिकार देना होगा। उन्होंने कहा कि बालिका को जन्म लेने का भी उतना ही अधिकार है, जितना बालक को। समाज को दोनों के बीच भेदभाव को समाप्त करना होगा, तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकते है। बालिका को सुरक्षा देकर हम महिला सशक्तिकरण की अवधारणा को साकार रूप दे सकते है।
श्रीमती बघेल के अनुसार घटते लिंगानुपात को बराबरी पर लाने के लिए जहाँ पुरूषों को अपनी मानसिकता बदलना पड़ेगी वहीं महिलाओं को भी जागरूक होकर बालिका भ्रूण हत्या का विरोध करना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को बेटियों को बोझ नही बल्कि वरदान समझना चाहिए। तेजी से बिगड़ रहे लिंगानुपात को सुधारने के लिए समाज को कन्याओं को बोझ समझने की मानसिकता और सोच से उबरना होगा। प्रदेश सरकार का बेटी बचाओ अभियान इसी दिशा में उठाया गया एक सार्थक प्रयास है, जिसे हम सभी को मिलकर सफल बनाना होगा।
श्रीमती रंजना बघेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में बालिकाओं के पक्ष में पूर्व से वातावरण निर्मित है। लाड़ली लक्ष्मी, सबला, किशोरी शक्ति, निःशुल्क सायकिल-गणवेश वितरण, प्रतिभा किरण, गाँव की बेटी आदि अनेक ऐसी योजनाएँ है, जिनके फलस्वरूप बेटियाँ अब किसी पर बोझ नहीं बल्कि आत्म- निर्भर बनेगी। समाज को भी बालिकाओं की महत्ता को स्वीकारना होगा। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ अभियान राज्य सरकार का ही नहीं प्रत्येक व्यक्ति और समाज का अभियान बनना चाहिए। अभियान को सफल बनाने में समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
Date: 03-10-2011
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