भोपाल, इंदौर, रजिस्ट्रार कार्यालय और भूमाफियाओं की
मिलीभगत के चलते 5 एकड़ सरकारी जमीन का पहले पावर आफ एटार्नी हो गया और बाद में उसकी रजिस्ट्री भी कर दी गई।
इंदौर के छोटा बागड़दा इलाके में 5 एकड़ सरकारी जमीन जिस पर श्मशान बनना था वहा कॉलोनी काट दी गई। पहले रजिस्ट्रार कार्यालय से फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी तैयार करवाई गई और फिर उस पॉवर के आधार पर धडाधड़ पांच रजिस्ट्री करवा दी गईं। मामला जानकारी में आने के बाद रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री पर रोक लगा दी।
इस पूरे गोरखधंधे की शुरुआत दिसंबर 2010 में हुई जब हकीम, हमीद और हसन ने ये जमीन अपनी बताते हुए इसकी पॉवर ऑफ अटोर्नी अजमेरी खा के नाम पर करने के लिए सब रजिस्ट्रार आरके मंडलोई के सामने कागजात पेश किए। मंडलोई ने जब जाच की तो पाया कि ये जमीन सरकारी है। इस पर पॉवर की कार्यवाही को रद करते हुए इसकी शिकायत रजिस्ट्रार से कर दी। सरकारी
कागजात में यह जमीन श्मशान के लिए आरक्षित रखी गई थी। उसके बाद में इन
भूमाफियाओं ने सुखलिया रजिस्ट्रार कार्यालय में उपरजिस्ट्रार विनोद
दीक्षित से पॉवर ऑफ अटोर्नी करवा ली। ये क्षेत्र विनोद दीक्षित के अधिकार के बाहर था। मगर मिलीभगत के चलते पॉवर कर दिया गया। पॉवर हो जाने के बाद इन भूमाफियाओं ने 5 जनवरी 2011 को मोतीतबेला रजिस्ट्रार कार्यालय में इस जमीन पर बिना डायवर्शन किए ही 28 प्लॉट की रजिस्ट्री सब रजिस्ट्रर अनिल गोयल के कार्यालय में प्रस्तुत कर दीं। अनिल गोयल उस दिन अनुपस्थित थे और
उनकी जगह उनका एवजी कर्मचारी राजेश गोयल उनका काम संभाल रहा था। राजेश
गोयल को 28 रजिस्ट्री करने का ठेका दिया गया। 5 रजिस्ट्रियों की फीस तुरंत भरवाकर उसी दिन रजिस्ट्री कर दी गई। जबकि 23 रजिस्ट्री दूसरे दिन करने की बात हुई। जब इस बात की जानकारी रजिस्ट्रार श्रीकांत पाडे को लगी तो उन्होंने बाकी रजिस्ट्री पर रोक लगवाकर विभागीय जाच शुरू करवा दी। मामला रजिस्ट्रार कार्यालय के अंदर ही गड़बड़ियों का था, इसलिये पूरे मामले को
छुपाकर रखा गया। गौरतलब है कि सुखलिया के सब रजिस्ट्रार विनोद दीक्षित पर
इसी तरह अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर पद का दुरुपयोग करने के लिए पिछले
सप्ताह ही रजिस्ट्रार ने कारण बताओ नोटिस दिया था।
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