सोमवार, 11 मार्च 2013

राज्यपाल को सेवानिवृत्ति के बाद मिलेगी पेंशन

भोपाल 11 मार्च 2013। प्रदेश की शिवराज सरकार अब राज्य के गवर्नर को सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन देने की तैयारी कर रही है। हांलाकि यह विषय केन्द्र सरकार का है लेकिन केन्द्र सरकार के तत्सम्बन्धी कानून में राज्यपालों को कार्यकाल समाप्ति के बाद मासिक पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है जबकि देश के राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति को सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन देने का कानूनी प्रावधान है।
प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल रामनरेश यादव के समय मुख्यमंत्री चौहान ने अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम वर्ष में राज्य मंत्रालय में इस संबंध में एक फाईल मूवमेंट में लायी है। मुख्य सचिव आर परशुराम को लिखित निर्देश दिये गये हैं कि वे राज्यपाल के कार्यकाल समाप्ति के उपरान्त उन्हें मासिक सम्मान निधि अथवा पेंशन एवं चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध कराने के संबंध में कोई प्रावधान लायें। दरअसल केन्द्र सरकार ने वर्ष 1982 में द गवर्नर एमोल्युमेंट्स, एलाउन्सेस एण्ड प्रिविलेजेस एक्ट लागू किया था। इसमें देश के राज्यपालों को मासिक वेतन एवं अन्य सुविधायें देने का प्रावधान तो है परन्तु रिटायरमेंट के बाद उन्हें मासिक पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है। इस समय देश के राज्यपालों को 1 लाख 10 हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया जा रहा है। देश के राष्ट्रपति को डेढ़ लाख रुपये तथा उपराष्ट्रपति को सवा लाख रुपये प्रति माह वेतन दिया जा रहा है तथा उन्हें रिटायरमेंट के बाद वेतन की आधी राशि मासिक पेंशन के रुप में देने का भी कानूनी प्रावधान है।
गत 30 नवम्बर,2012 को राज्यपालों को सेवानिवृत्ति के बाद अपने निजी कार्यालय में सरकारी व्यय पर पर्सनल असिस्टेंट रखने की सुविधा प्रदान करने के लिये केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने द गवर्नर एमोल्युमेंट्स, एलाउन्सेस एण्ड प्रिविलेजेस एक्ट 1982 में संशोधन सम्बन्धी बिल पेश किया है जिसमें पर्सनल असिस्टेंट रखने पर आने वाले वित्तीय भार हेतु एक करोड़ 95 लाख रुपयों का वित्तीय ज्ञापन दिया गया है। लेकिन इस बिल में स्पष्ट किया गया है कि राज्यपालों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल रामनरेश यादव बीसवें गवर्नर हैं। हांलाकि कुछ गवर्नर दो-दो, तीन-तीन बार बने हैं इसलिये क्रम में श्री यादव का नाम पच्चीसें नम्बर पर है। उनसे पूर्व अब तक 
बी. पट्टाभि सीतारमैया, हरी विनायक पटास्कर, के.सी. रेड्डी,जस्टिस पी.वी. दीक्षित (एक्टिंग),के.सी. रेड्डी, सत्यनारायण सिन्हा, निरंजन नाथ वांचू, चिप्पुदिरा मुथाना पुनाचा, भगवत दयाल शर्मा, जस्टिस जी.पी. सिन्हा (एक्टिंग), भगवत दयाल शर्मा, जस्टिस जी.पी. सिन्हा (एक्टिंग), भगवत दयाल शर्मा, के.एम. चान्डी, जस्टिस एन.डी. ओझा (एक्टिंग), के.एम. चान्डी, श्रीमती सरला ग्रेवाल, कुंवर मेहमूद अली खान, डॉ. मोहम्मद शफी कुरैशी, डॉ. भाई महावीर, राम प्रकाश गुप्त, कृष्ण मोहन सेठ (एक्टिंग),डॉ. बलराम जाखड़ एवं रामेश्वर ठाकुर प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं जिनमें से कुछ दिवंगत हो गये हैं। वर्तमान राज्यपाल रामनरेश यादव ने 8 सितम्बर,2011 को पदभार ग्रहण किया है। यदि शिवराज सरकार राज्यपालों को सेवानिवृत्ति के बाद मासिक सम्मान निधि या पेंशन देने का प्रावधान लाई तो प्रदेश के सेवानिवृत्त राज्यपालों के साथ दिवंगत राज्यपालों की पत्नी या पति को मासिक पेंशन का लाभ मिलेगा।

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